महेश कुमार की कहानी ‘पहचान’

पहचान के जो मायने स्त्रियों के लिए हैं क्या पुरुषों के लिए भी वही हैं? निश्चित ही नहीं। पुरुषों के…

सुबी ताबा से आशुतोष कुमार ठाकुर की बातचीत

आज पढ़िए अरुणाचल की लेखिका सुबी ताबा से बातचीत। सुबी का कहानी संग्रह ‘Tales from the Dawn-Lit Mountains’ मैंने जाने-माने लिटरेरी…

प्रज्ञा विश्नोई की कहानी ‘प्रेम त्रिकोण’

बिल्डिंग से बाहर निकलते ही मानसी को हसास हुआ कि ट्रेनिंग के पहले सेशन की जगह मनु को खोजने का…

क्या प्रकृति को भी पितृसत्ता से आज़ादी चाहिए?

यह लेख प्रकृति और मनुष्य के रिश्ते को स्त्रीवाद के नज़रिए से देखती है। इको फेमिनिज्म पर कुमारी रोहिणी का…

पहली मंज़िल का वह किताबों वाला कमरा

आज पढ़िए अनामिका अनु का लिखा यह ललित गद्य जिसमें बात घर में एक लड़की के कमरे से शुरू होती…

स्याह पन्ने सफ़ेद किताब

आज प्रस्तुत है मनप्रीत कौर मखीजा की कहानी ‘स्याह पन्ने सफ़ेद किताब’। विभाजन, दंगे, विस्थापन यह सब कुछ ऐसा है…

जब पहाड़ रोते हैं तो मैदान भीगते हैं

नेपाल में आई भयंक बाढ़ को लेकर लिखी यह एक लेखक की डायरी है। एक ऐसे लेखक की जो भारत-नेपाल…

पोस्ट ट्रुथ क्या होता है?

हाल में युवा लेखक शहादत और अक्षत जैन ने जानी-मानी सामाज शास्त्री और इतिहासकार मीरा नंदा की किताब A Field…

प्रज्ञा विश्नोई की कहानी ‘फ़िल्म थियेटर में एक शाम’

प्रज्ञा विश्नोई समकालीन लेखकों में सबसे अलग हैं। प्रचार-प्रसार से दूर चुपचाप लेखन कर रही हैं। बहुत अलग लिखती हैं,…

गाब्रियल गार्सिया मार्केस की कहानी ‘दोपहर की नींद’

संभवतः यह गाब्रियल गार्सिया मार्केस की हिन्दी में अनूदित पहली कहानी है। इसका अनुवाद तब हुआ था जब मार्केस को…

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