गाब्रियल गार्सिया मार्केस की कहानी ‘दोपहर की नींद’

संभवतः यह गाब्रियल गार्सिया मार्केस की हिन्दी में अनूदित पहली कहानी है। इसका अनुवाद तब हुआ था जब मार्केस को…

‘सम्पा’ पर यतीश कुमार की काव्यात्मक टिप्पणी

संजीव पालीवाल और मीनाक्षी चौधरी की लिखी किताब आई है ‘सम्पा’। वेस्टलैंड से प्रकाशित इसी किताब पर अपनी विशेष काव्यात्मक…

चौक का जादूगर अमृतलाल नागर

कल हिन्दी के बड़े क़िस्सागो अमृतलाल नागर की जयंती थी। इस अवसर पर पढ़िए युवा शोधार्थी, शायर अभिषेक अम्बर का…

मेरी माँ, मेरी गैंगस्टर: निजी इतिहास में छिपा सामाजिक इतिहास

अरुंधति रे की किताब प्रभात सिंह के अनुवाद में  ‘मेरी माँ, मेरी गैंगस्टर’ जब से प्रकाशित हुई है लगातार चर्चा…

जीवन वही है जो जीने और रोने दोनों के लिए पर्याप्त है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के शोधार्थी लक्की कुमार मिश्रा ने बहुत अच्छा लेख लिखा है। एलियनेशन पर लिखा यह लेख हम सबको…

भारतीय ज्ञान परम्परा – एक विहङ्गम दृष्टि

इस साल उन्मोचन शृंखला की पाँच पुस्तकों का प्रकाशन हुआ है। वाणी प्रकाशन से प्रकाशित इन पुस्तकों में से भारत…

पोम्पेई- आउट ऑफ़ टाइम (डॉक्यूमेंट्री): निष्ठा अभिजीत अग्निहोत्री

  पोम्पेई: आउट ऑफ़ टाइम विद टॉम हिडलस्टन (Pompeii: Out of Time with Tom Hiddleston) नेशनल ज्योग्राफिक की एक 3-भाग…

क्रिस्टोफर नोलन की द ओडिसी और होमेर का महाकाव्य

होमर द्वारा लिखी प्राचीन ग्रीक महाकाव्य ओडिसी पर हाल में ही क्रिस्टोफ़र नोलन की फ़िल्म आई है- द ओडिसी। इस…

बीसवीं सदी की वैचारिकी और नामवर सिंह

आज हिन्दी के प्रसिद्ध आलोचक नामवर सिंह की जयंती है। इस अवसर पर पढ़िए यह लेख जिसे लिखा है विशाल…

ख़ालिद जावेद का उपन्यास: यतीश कुमार की टिप्पणी

ख़ालिद जावेद उर्दू के ऐसे लेखक हैं जिनको हिन्दी में खूब पढ़ा जाता है। हाल में उनका उपन्यास रेख्ता से…

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