‘दूसरी परंपरा’ पत्रिका ने अपने कुछ अंकों में नए रचनाकारों को सामने लाने का बढ़िया काम किया है। उसका प्रमाण…
कुछ कविताएं केदारनाथ सिंह के नए संग्रह से
हमारी भाषा के महान कवियों में एक केदारनाथ सिंह ने इस साल 80 वें साल में प्रवेश किया है, और…
आपने ‘लूजर कहीं का’ पढ़ी है?
लूजर कहीं का– मैंने पढ़ा है इस उपन्यास को। बिहार से दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस आना, सपनों में खो…
ढो रहे हैं अपने पूर्वजों का रक्त और वीर्य
हाल में ‘तहलका’ में आए एक लेख के कारण हिन्दी में स्त्री विमर्श फिर से चर्चा में है। प्रसिद्ध रंगकर्मी,…
बिमल राय जैसा गैरमामूली फिल्मकार मर सकता है?
आज हिन्दी सिनेमा के मुहावरे को बदल कर रख देने वाले फ़िल्मकार बिमल राय की पुण्यतिथि है।युवा फिल्म समीक्षक सैयद…
आइंस्टीन का पत्र राष्ट्रपति रूज़वेल्ट के नाम
द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान आइंस्टीन द्वारा रूज़वेल्ट को लिखे गए इस पत्र को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। बाद में…
जिंदगी अजीब है, मौत भी अजीब होती होगी
इस साल की पहली किताब मैंने पढ़ी ‘Lovers like You and I’. मीनाक्षी ठाकुर के इस उपन्यास ने बहुत प्रभावित…
क्रांति-क्रांति-क्रांति, भ्रांति, भ्रांति, भ्रांति!
साहित्य में क्रांति-क्रांति करने वाले हिन्दी लेखक अक्सर सामाजिक क्रांतियों से दूर ही रहते आए हैं। आज ‘प्रभात खबर’ में…
भारंगम की हलचल शुरू हो गई है
भारंगम की शुरुआत होने वाली है। उसकी तैयारियों, उसमें दिखाये जाने वाले नाटकों के बहाने बहुत शानदार लेख लिखा है…
एक छोटी कहानी ‘शॉर्ट फिल्म’
मैं मूलतः कथाकार हूँ। भूलतः कुछ और हूँ। इसी बात की याद दिलाने के लिए कभी-कभी आपको अपनी कहानियाँ पढ़वाता…



