अपने घर के आंगन में विनोद जमलोकी। आपके पीछे जो वनस्पतियां दिख रही हैं वहां भू-स्खलन से पहले एक…
मई दिवस पर एक जर्मन कहानी हिंदी अनुवाद में
आज मई दिवस पर प्रस्तुत है कहानी ‘तृप्त मछुआरा’, जो जर्मन भाषा के नोबेल पुरस्कार विजेता लेखक हाइनरिश ब्योल की है.…
वाम के समक्ष साख का संकट है या फिर नेतृत्व का?
लेखक-पत्रकार अनंत विजय का यह पत्र कल ‘जनसत्ता’ में छपा था. सीपीएम के महासचिव प्रकाश करात के नाम. वाम राजनीति…
वी एस नायपाल के उपन्यास ‘गुरिल्लाज’ का पाठ
हाल में वी.एस. नायपॉल के कई उपन्यासों के हिंदी अनुवाद पेंगुइन से छपकर आये, जिनमें उनका एक महत्वपूर्ण उपन्यास ‘गुरिल्लाज’…
बदलते दौर की रूढ़ियों की पहचान
हिंदी प्रकाशन जगत की समस्त घटनाएं दिल्ली में ही नहीं होती हैं. कुछ अच्छी पुस्तकें केंद्र से दूर परिधि से…
रुज़ेविच की कविताओं का मूल पोलिश भाषा से अनुवाद
तादेऊष रुज़ेविच के निधन पर याद याद आया कि उनकी कविताओं का मूल पोलिश से अनुवाद अशोक वाजपेयी जी ने…
शैलेश मटियानी का पहला इंटरव्यू
हिंदी में बेहतरीन प्रतिभाओं की उपेक्षा कितनी होती है शैलेश मटियानी इसके उदहारण हैं. 24 अप्रैल को उनकी पुण्यतिथि थी.…
मैं तुम्हें छू लेना चाहता था, मार्केस!
युवा लेखक श्रीकांत दुबे पिछले दिनों मेक्सिको में थे. मार्केस के शहर मेक्सिको सिटी में. तब मार्केस जिन्दा थे. उनका…
सुनील ने संन्यासी सा जीवन जिया
समाजवादी जन परिषद् के महामंत्री सुनील का महज 54 साल की आयु में निधन हो गया. जेएनयू से अर्थशास्त्र की…
कोई लटक गया फांसी किसी ने छोड़ दिया देश
इस बार आम चुनावों में जमीन से जुड़े मुद्दे गायब हैं. खेती, किसान, अकाल, दुर्भिक्ष, पलायन- कुछ नहीं. जमीन से…



