पंकज पराशर संगीत-शायरी पर जब लिखते हैं तो बहुत अलग लिखते हैं। भाषा और विषय दोनों में महारत के साथ।…
ज़ौक़ जा पाया नहीं दिल्ली की गलियाँ छोड़कर
आज उस शायर की पुण्यतिथि है जिसने लिखा था ‘कौन जाए ज़ौक़ अब दिल्ली की गलियाँ छोड़कर’। उनके ऊपर…
कश्मीर, किताबें, और… पता नहीं क्या कुछ: प्रदीपिका सारस्वत
कश्मीर की कुछ यादों के साथ प्रदीपिका सारस्वत लौटी हैं। उनके गद्य के हम सब क़ायल रहे हैं। यह…
एफ आर लीविस का नैतिक बोध और ‘हम दो हमारे दो’ फिल्म
विकास कुमार दिल्ली विश्वविद्यालय में एमए के छात्र हैं। उन्होंने प्रसिद्ध ब्रिटिश साहित्य चिंतक एफ आर लीविस के विचारों तथा…
हिंदी बाल साहित्य का इतिहास: प्रकाश मनु
आज बाल दिवस है। इस मौक़े पर पढ़िए वरिष्ठ लेखक प्रकाश मनु का यह लेख। प्रकाश जी ने हिंदी…
जन्मदिन पर पत्नी के नाम ख़त
जनाब सुहैब अहमद फ़ारूक़ी पुलिस अधिकारी हैं लेकिन हम उनको शायर के रूप में जानते हैं। उनकी बेगम आशकारा खानम…
राजीव कुमार की कहानी ‘दिल्ली की एक शाम’
आज पढ़िए राजीव कुमार की कहानी। राजीव कुमार की कहानियाँ, कविताएँ, साहित्यिक टिप्पणियाँ हम पढ़ते रहे हैं। यह उनकी…
युवा कवि चंद्रकुमार की कविताएँ
चंद्रकुमार ने कॉर्नेल विश्वविद्यालय, न्यूयार्क से पढ़ाई की। वे आजकल एक निजी साफ्टवेयर कंपनी में निदेशक है लेकिन उनका पहला…
स्मृतियों में धड़कता इलाहाबाद
वरिष्ठ लेखिका ममता कालिया की किताब ‘जीते जी इलाहाबाद’ पर यह सुंदर टिप्पणी लिखी है आलोक कुमार मिश्रा ने। आप…
‘सरदार उधम’ : एक क्रांतिकारी को विवेक सम्मत श्रद्धा–सुमन
आजकल ‘सरदार उधम’ फ़िल्म की बड़ी चर्चा है। इसी फ़िल्म पर यह विस्तृत टिप्पणी लिखी है मनोज मल्हार ने, जो…



